SurYatra : A Musical Carvan

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Juthika Roy Shikhar Samman : News Coverage

by pavanjha on Apr.21, 2010, under Artists, Events, General, Press, Special Events

जीवंत हुआ आजादी का पहला सुर

Bhaskar News
First Published 00:46[IST](19/04/2010)
Last Updated 00:46[IST](19/04/2010)

[Original Source : http://www.bhaskar.com/2010/04/19/yuthika-rai-in-jaipur-886683.html]

देश की आजादी की पहली सुबह 15 अगस्त, 1947 को आकाशवाणी से पहली देशभक्ति रचना गाने वाली लिविंग लीजेंड यूथिका रॉय रविवार को शहर के संगीत प्रेमियों से रूबरू हुईं। उनका यह कार्यक्रम सुर यात्रा की ओर से इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान के ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया। पहले सुर को सुनने के लिए संगीत रसिक कार्यक्रम के निर्धारित समय 7 बजे से पहले ही ऑडिटोरियम में पहुंच गए।

हालांकि नब्बे वर्षीय जीवित किंवदंती रॉय को संगीत रसिक हर हालत में सुनने को आतुर थे। यही वजह रही कि एक घंटे से भी अधिक का समय लोगों ने बड़े ही धर्य से बिता दिया। रात ठीक 8 बजे सफेद साड़ी में यूथिका रॉय ऑडिटोरियम में आईं तो लोगों ने खड़े होकर संगीत जगत की इस अजीम शख्सियत का स्वागत किया। इस दौरान उन्हें संस्था की ओर से शिखर यात्रा सम्मान भी दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत शहर की युवा गायिका सुप्रिया के गायन से हुई। सुप्रिया ने यूथिका के गाए पग घूंघरू बांध मीरा नाची, मेरे तो गिरधर गोपाल और म्हाने चाकर रखो जी सहित कई लोकप्रिय भजन सुनाए। बाद में यूथिका रॉय ने भी कुछ रचनाएं गाकर श्रोताओं की जिज्ञासा को शांत किया। इससे पूर्व दोपहर में यूथिका रॉय राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के सभागार में लोगों से रूबरू हुईं।

उन्होंने अतीत के कई यादगार लम्हे लोगों को सुनाए। उन्होंने कहा, आज का दिन मेरे लिए बेहद यादगार है। जयपुर में पहली बार आना हुआ है और ऐसे में अपने अतीत को याद करना तो और भी रोमांचित कर रहा है।

‘गांधीजी तो दीवाने हैं आपके गाने के’

सन् 1945 में हैदराबाद में एक बार किसी जमींदार ने उनसे कहा कि सरोजिनी नायडू आपका गाना सुनना चाहती हैं। मैंने कहा चलिए, वहां जाकर उनसे मुलाकात की और उन्हें गैर- फिल्मी गीत और भजन सुनाए। इस दौरान सरोजिनी ने मुझसे कहा, गांधीजी तो आपकी गायिकी के दीवाने हैं। इसके बाद गांधीजी से मिलने की इच्छा जाग्रत हुई तो कोलकाता चली आई, वहां पर गांधीजी अपने अनुयाइयों के साथ आए हुए थे।

मैं अपने परिवार के लोगों के साथ उनसे मिलने गई पर सफलता नहीं मिली। अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। भीगने से बचने के लिए हमने दरवाजा खटखटाया तो आभा गांधी ने दरवाजा खोला और पूछा किससे मिलना है। मैंने कहा मेरा नाम यूथिका रॉय है, मुझे बापू से मिलना है। इतना कहने पर उन्होंने मुझे अंदर बुलाया और कहा सामने वाले कमरे में गांधीजी हैं, जाइए मिल लीजिए। यहां पर मैंने गांधी को अपने प्रिय भजन ‘पग घुंघरु बांध मीरा नाची थी..’ व ‘घर आयो प्रीतम प्यारा..’ सुनाया। उन्होंने मेरे सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और कहा तुम बहुत ही अच्छा गाती हो।

खत्म हो गए प्यार के दो पल

बीते जमाने को याद करते हुए उन्होंने कहा, पहले का जमाना अलग था। लोगों के दिलों में जज्बात धड़कते थे। एक-दूसरे से कंधे से कंधा मिलाकर चलते थे। उनके चलने- बोलने और बात करने का तरीका भी कुछ अलग हटकर हुआ करता था, इसलिए उनमें प्यार झलकता था। आजकल यह प्यार खत्म हो गया है।

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